Thursday, 24 December 2015

गति के नियम- कक्षा 11 अध्याय 5

प्रश्न-1  बल किसे कहते हैं?

उत्तर-

बल वह कारक है जो किसी पिण्ड को विराम से गति में लाने के लिए तथा किसी गतिशील वस्तु की गति को रोकने अथवा मंद करने के लिए आवश्यक होता है।

उदाहरण-

1. विरामावस्था में पड़ी फुटबाल को गति प्रदान करने के लिए किसी न किसी को उस पर अवश्य ठोकर मारनी होती है ।

2. किसी पत्थर को उस पर की ओर फेंकने के लिए, हमें उसे ऊपर की ओर प्रक्षेपित करना पड़ता है।

3. मंद पवन पेड़ की शाखाओं को झुला देती है।

4. प्रबल वायु का झोंका तो भारी पिण्डों तक को भी लुढ़का सकता है।

5. बहती नदी किसी के न खेने पर भी नाव को गतिमान कर देती है।

6. किसी आनत तल पर नीचे की ओर लुढ़कती किसी गेंद को उसकी गति की विपरीत दिशा में बल लगाकर रोका जा सकता है।

7. गुरूत्वाकर्षण बल, आवेशों के बीच आकर्षण या प्रतिकर्षण बल, चुंबक का बल आदि।

प्रश्न-2  संपर्क तथा असंपर्क बलों में अंतर स्पष्ट कीजिए?

उत्तर-

संपर्क बल- जब बल लगाने वाली वस्तु, जिस वस्तु पर बल लगाया जा रहा है, उसके संपर्क में हो तो ऐसा बल ‘‘संपर्क बल’’ कहलाता है।

उदाहरण- फुटबाल को गति प्रदान करने के लिए उस पर अवश्य ठोकर मारना, पवन द्वारा पेड़ की शाखाओं को झुलाना, लुढ़कती गेंद को उसकी गति की विपरीत दिशा में बल लगाकर रोकना आदि।

असंपर्क बल- जिस वस्तु पर बल लगाया जा रहा है, बल लगाने वाली वस्तु से उसका कोई संपर्क नहीं हो तो ऐसा बल ‘‘असंपर्क बल’’ कहलाता है।

उदाहरण- किसी भवन के शिखर से बिना अधोमुखी धक्का दिये मुक्त किया गया पत्थर पृथ्वी के गुरुत्वीय खिंचाव के कारण त्वरित होता है (गुरूत्वाकर्षण बल), कोई छड़ चुंबक लोहे की कीलों को दूर से ही, अपनी ओर आकर्षित कर लेता है (चुंबकीय बल), आवेशों के बीच आकर्षण या प्रतिकर्षण बल।

प्रश्न-3  अरस्तू की भ्रामकता को समझाईए। किसने इस भ्रामकता को दूर किया था?

उत्तर-

अरस्तू ने गति का नियम दिया कि किसी पिण्ड को गतिशील रखने के लिए बाह्य बल की आवश्यकता होती है। उदाहरण के लिए, किसी धनुष से छोड़ा गया तीर उड़ता रहता है, क्योंकि तीर के पीछे की वायु उसे धकेलती रहती है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता है। इसी प्रकार किसी खिलौना गाड़ी को निरंतर चलाने के लिए उसे डोरी से खींचते रहना पड़ता है।

अरस्तू का गति का यह नियम दोषपूर्ण है। इसे ही अरस्तू की भ्रामकता कहते हैं। गैलीलियो ने अपने प्रयोगों के आधार पर इस भ्रामकता को दूर किया तथा जड़त्व का नियम दिया। गैलीलियो ने बताया कि प्रकृति में सदैव ही विरोधी घर्षण बल (ठोसों के बीच) अथवा श्यान बल (तरलों के बीच) आदि उपस्थित रहते हैं जो गति का विरोध करते हैं। इसीलिए हमें वस्तुओं में एकसमान गति बनाए रखने के लिए घर्षण बलों को निष्फल करने हेतु बाह्य साधनों द्वारा बल लगाना आवश्यक होता है।

प्रश्न-4  जड़त्व का नियम देने के लिए गैलीलियो ने कौनसे प्रयोग किए थे? इनका वर्णन कीजिए।

उत्तर-

प्रयोग-1

गैलीलियो ने वस्तुओं की गति का अध्ययन एक आनत समतल पर किया।

1. उन्होंने एक आनत समतल पर नीचे की ओर वस्तु की गति करवाई और निष्कर्ष निकाला कि आनत समतल पर नीचे की ओर गतिमान वस्तुएं त्वरित होती हैं।

2. फिर उन्होंने वस्तु की आनत समतल पर ऊपर की ओर गति करवाई और निष्कर्ष निकाला कि आनत समतल पर ऊपर की ओर जाने वाली वस्तुओं में मंदन होता है।

3. इसके बाद उन्होंने क्षैतिज समतल पर वस्तु की गति कराई तथा यह पाया कि अधिक घर्षण होने पर वस्तु कम दूरी पर रूक जाती है जबकि कम घर्षण होने पर वस्तु अधिक दूरी तक जा कर रूकती है।

इसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि किसी घर्षण रहित क्षैतिज समतल पर गतिशील किसी वस्तु में न तो त्वरण होना चाहिए और न ही मंदन, अर्थात् इसे एकसमान वेग से गति करनी चाहिए।

प्रयोग-2

अपने दूसरे प्रयोग में गैलीलियो ने द्विआनत समतल (एक आनत समतल के सामने दूसरा आनत समतल) का उपयोग किया। इसमें उन्होंने पहले आनत समतल पर एक गेंद को विरामावस्था से छोड़ा तथा पाया कि छोड़ी गई गेंद नीचे लुढ़कती है और दूसरे आनत समतल पर ऊपर चढ़ती है। यदि दोनों आनत समतलों के पृष्ठ अधिक रुक्ष (खुरदरे) नहीं हैं तो गेंद की अंतिम ऊंचाई उसकी आरंभिक ऊंचाई के लगभग समान होती है। यह आरंभिक ऊंचाई से सदैव कुछ कम होती है, परंतु अधिक कभी नहीं होती है। आदर्श स्थिति में, जब घर्षण बल पूर्णतः विलुप्त कर दिया जाता है, तब गेंद की अंतिम ऊंचाई उसकी आरंभिक ऊंचाई के समान होनी चाहिए।

प्रयोग-3

गैलीलियो ने बहुत कम घर्षण वाले द्विआनत समतल के दूसरे समतल के ढाल को घटाकर प्रयोगों को दोहराया। उन्होंने पाया कि कम ढाल करने पर वस्तु अधिक दूरी चलती है किंतु उसके द्वारा चढ़ी गई ऊंचाई वही रहती है। जब उन्होंने दूसरे समतल का ढाल शून्य कर दिया अर्थात् दूसरे समतल को क्षैतिज कर दिया। तब उन्होंने पाया कि गेंद बहुत अधिक दूरी तक चलती है। आदर्श स्थिति में यदि घर्षण शून्य कर दिया जाए तो गेंद अनन्त दूरी तक चलेगी अर्थात इसकी गति कभी नहीं रुकेगी।

निष्कर्ष- बाह्य विरोधी घर्षण बल के कारण वस्तु विराम में आ जाती है। यदि घर्षण न होता तो लुढ़कती गेंद क्षैतिज समतल पर एकसमान वेग से निरंतर चलती रहती।

प्रश्न-5 जड़त्व से क्या तात्पर्य होता है? गैलीलियो का जड़त्व का नियम लिखिए।

उत्तर-

जड़त्व से तात्पर्य है- ''परिवर्तन के प्रति प्रतिरोध''। वस्तु द्वारा अपनी स्थिति या गति में परिवर्तन का विरोध किया जाता है, वस्तु के इस गुण को जड़त्व कहते है। स्थानांतरण गति में वस्तु का द्रव्यमान ही वस्तु का जड़त्व होता है

गैलीलियो का जड़त्व का नियम- कोई पिण्ड अपनी विरामावस्था अथवा एकसमान गति की अवस्था में तब तक कोई परिवर्तन नहीं करता जब तक कोई नेट बाह्य बल उसे ऐसा करने के लिए विवश नहीं करता।

प्रश्न-6  न्यूटन के गति के प्रथम नियम को स्पष्ट कीजिए?

उत्तर-

न्यूटन का गति का प्रथम नियम-

गैलीलियो की सरल परंतु क्रांतिकारी धारणाओं ने अरस्तू की यांत्रिकी को पूर्णतया नकार दिया जिसमें अरस्तू ने कहा था कि किसी पिण्ड को गतिशील रखने के लिए बाह्य बल की आवश्यकता होती है। गैलीलियो की धारणाओं के आधार पर सभी युगों के महानतम वैज्ञानिक माने जाने वाले सर आइजक न्यूटन ने एक नई यांत्रिकी का विकास किया, जो न्यूटन ने गति के तीन नियमों के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने गैलीलियो का जड़त्व के नियम को गति के प्रथम नियमके रूप में संरूपित किया, इस प्रकार है:-

प्रत्येक पिण्ड तब तक अपनी विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बना रहता है जब तक कि कोई नेट बाह्य बल उसे अन्यथा व्यवहार करने के लिए विवश नहीं करता।

विरामावस्था अथवा सरल रेखा में एकसमान गति दोनों ही अवस्थाओं में त्वरण शून्य होता है। अतः गति के प्रथम नियम को, सरल शब्दों में, इस प्रकार भी व्यक्त किया जा सकता है:

यदि किसी पिण्ड पर लगने वाला नेट बाह्य बल शून्य है, तो उसका त्वरण शून्य होता है। शून्येतर त्वरण केवल तभी हो सकता है जब पिण्ड पर कोई नेट बाह्य बल लगता हो।

प्रश्न- 7 यदि पृथ्वी पर स्थित कोई वस्तु विरामावस्था है जैसे- मेज पर रखी कोई पुस्तक अथवा कोई वस्तु एकसमान रैखिक गति का अवस्था में है, जैसे- एकसमान वेग से गतिमान कार, तब क्या जड़त्व के नियम के अनुसार उन पर कोई बाह्य बल कार्यरत नहीं होता है? अपने उत्तर का कारण दीजिए।

उत्तर-

            नहीं, ऐसा नहीं होता है कि विरामावस्था में स्थित वस्तु या एकसमान रैखिक गति का अवस्था में स्थित वस्तु पर कोई बल कार्यरत नहीं है, बल्कि उस पर कुछ बल कार्यरत हो सकते हैं, लेकिन उन पर कार्यरत विभिन्न बाह्य बल एक दूसरे को निरस्त करके सभी बलों के योग को शून्य नेट बाह्य बल' बनाते हैं।

जैसे-

1. मेज पर रखी किसी पुस्तक पर दो बाह्य बल कार्यरत होते हैं:

            (i) गुरुत्वीय बल W (अर्थात् पुस्तक का भार) नीचे की दिशा में कार्यरत होता है तथा

            (ii)  मेज द्वारा पुस्तक पर ऊपर की दिशा में अभिलंब प्रतिक्रिया बल R कार्यरत होता है। R स्वयं समायोजित होने            वाला बल है।

            अभिलंब प्रतिक्रिया बल R स्वयं समायोजित होकर गुरुत्वीय बल W के बराबर हो जाता है।

            चूंकि W = R , ये दोनों बल एक दूसरे को निरस्त करते हैं, इसीलिए पुस्तक विराम की स्थिति में रहती है।
 

2. गतिशील वस्तुएं जैसे कार आदि पर इंजन द्वारा लगाए जाने वाले बल के विपरीत सदैव ही घर्षण बल, श्यान कर्षण आदि कार्य करते हैं, जो एक दूसरे को निरस्त करते हैं। इसके अलावा उस पर गुरुत्वीय बल W एवं अभिलंब प्रतिक्रिया बल R भी कार्यरत होता है जो एक दूसरे को निरस्त कर देते हैं। इस प्रकार जब पृथ्वी पर स्थित कोई वस्तु एकसमान रैखिक गति में हो, तब ऐसा नहीं है कि उस पर कोई बल कार्यरत नहीं है, वरन् उस पर कार्यरत विभिन्न बाह्य बल एक दूसरे को निरस्त करके सभी बलों के योग को शून्य नेट बाह्य बल बनाते हैं।
 

2 comments:

Unknown said...

न्युटन के गति के पहले नियम को व्युत्पन करे

Unknown said...

कृपया आंकिक र्पश्न अौर उनके , solutions डालें thanks bhai
और उपर के प्रश्न बहुत बढ़िया है और डालते रहना